संक्षिप्त इतिहास:

सैन्य विज्ञान / रक्षा अध्ययन / रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन / सुरक्षा अध्ययन एक अंतरविषयी अकादमिक अनुशासन है, जिसके केंद्र में राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल है। यह विषय सुरक्षा के बहुआयामी स्वरूप का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिसमें सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय तथा तकनीकी आयाम सम्मिलित हैं। भारत में विश्वविद्यालय स्तर पर सैन्य विज्ञान विभागों की स्थापना 1960 के दशक में हुई, जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम विभागों की स्थापना पुणे एवं प्रयागराज में की गई। इसके साथ ही यह विषय एक संगठित एवं व्यवस्थित अकादमिक अनुशासन के रूप में स्थापित हुआ। अतः इस विषय का अध्ययन करते समय इसके व्यापक एवं बहुआयामी दृष्टिकोण को ध्यान में रखना आवश्यक है। रक्षा एवं सामरिक अध्ययन के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा, भू-राजनीति, सैन्य इतिहास, सैन्य भूगोल, शांति एवं संघर्ष अध्ययन, आपदा प्रबंधन, रक्षा अर्थशास्त्र, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तथा भारत की रक्षा संगठनात्मक संरचना जैसे महत्वपूर्ण विषयों का समावेश किया जाता है। समकालीन वैश्विक व्यवस्था में राष्ट्रीय सुरक्षा की सम्यक समझ विकसित करने हेतु परिवर्तनशील घरेलू एवं वैश्विक परिदृश्य की प्रकृति का विश्लेषण अनिवार्य है। इसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, उभरती सुरक्षा चुनौतियाँ तथा गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों का अध्ययन भी शामिल है। यद्यपि सैन्य शक्ति की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख आधार है, तथापि यह अनुशासन केवल सैन्य आयाम तक सीमित नहीं है, बल्कि निम्नलिखित पहलुओं का भी गहन विश्लेषण करता है — i. कूटनीति एवं विदेश नीति की भूमिका ii. मानव मूल्य एवं मानव सुरक्षा के रूप में सुरक्षा की अवधारणा iii. सैन्य इतिहास एवं रणनीतिक अनुभव iv. घरेलू राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ v. सुरक्षा एवं रक्षा का अर्थशास्त्र vi. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में हो रहे नवीन विकास vii. अंतरराष्ट्रीय कानून एवं वैश्विक संस्थाओं की भूमिका

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